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What is woman??

There goes my another post that I wrote on Women's Day but couldn't post earlier, but as they say: better late than never: It all started with a joke, a repetitive joke. I find this joke at many many places where they say no one can ever answer what exactly a woman is?? Like anyone else I took this as a light joke for a long time, a real long time then I read somewhere that "there is little truth behind every just kidding". I do not know what in me caused me to relate these two things. Then I actually spent a good enough time, looking for answers of this questions. And now, I have reached a stage where I can say I have found the answer. Yes, I am that fortunate one who got the answer. Let's go over this : What exactly a woman is?? After thinking intensively and going over to all the historical data, events, I could find only one answer. Woman : The less powered, the more delicate, the more emotional & the more fragile one: woman is someone who is r

Be positive :- From Harivansh Rai Bachchan

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अँधेरे का दीपक है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था , भावना के हाथ से जिसमें वितानों को तना था , स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा , स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से , रसों से जो सना था , ढह गया वह तो जुटाकर ईंट , पत्थर कंकड़ों को एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है ? है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? बादलों के अश्रु से धोया गया नभनील नीलम का बनाया था गया मधुपात्र मनमोहक , मनोरम , प्रथम उशा की किरण की लालिमासी लाल मदिरा थी उसी में चमचमाती नव घनों में चंचला सम , वह अगर टूटा मिलाकर हाथ की दोनो हथेली , एक निर्मल स्रोत से तृष्णा बुझाना कब मना है ? है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? क्या घड़ी थी एक भी चिंता नहीं थी पास आई , कालिमा तो दूर , छाया भी पलक पर थी न छाई , आँख से मस्ती

साहस

समंदर में आज ख़ामोशी छाई थी हर तरफ शांति समायी थी धीरे से लहरें बह रही थी मानो धीमे से वो कुछ कह रही थी मौसम का रुख देख उसने नाँव बढ़ा दी रेत से निकाल कर पानी पर चढ़ा दी मंजिल तो पता थी पर ये सागर अनंत था पहूँचे कैसे की सिर्फ क्षितिज ही इसका अन्त था फिर भी आगे ही आगे वो बढ़ता गया गहेरे पानी में की वो उतरता गया मौसम के रुख ने की जैसे अब करवट ली वो शान्ति चुपचाप खुद में सिमट ली अब जो पानी का भंवर ऐसा आया लगा की सब कुछ खुद में बहा ले गया पर उस किश्ती की यही थी कहानी की तूफ़ान से भी उसने हार नहीं मानी लहरों पे लहेरे बढती गयी वो किश्ती पानी में फंसती गयी पर निकलने के लिए उसने भंवर को चीर दिया तूफ़ान को उसने बदल समीर में दिया

यादें

धुएं सा ये वक़्त ऊड़ एक पल में जाता है बीता हुआ हर लम्हा ख्वाबो में अक्सर मिलने आता है जो भी चाहा था इस दिल ने उसे पूरा तो कर लिया है इस भागती दोड़ती ज़िन्दगी में अधुरा ही पर जिया है शोरगुल,मौज मस्ती हालाँकि अब भी यहाँ रोज़ का है पर दिल तो फ़ुरसत के दो पल हमेशा खोजता है प्यार के वो पल काश फिर से कोई लौटा दे बारिश में झुला झूलने का फिर से कोई मौका दे इतनी भीड़ के बीच भी बस माँ के हाथो की नरमी याद आती है AC में बैठे बैठे हमेशा वो छुट्टियों की गर्मी याद आती है माना की बीता वक़्त कभी लौट कर आता नहीं है पर ये भी सच है की दिल की हसरत बस यही है |

For my Bhaiya:"On the auspicious ocassion of Rakhi"

I'm just sitting here thinking about what you mean to me, Remembering all the things you've done for me, You've been there for me from the start, Knowing what to say to keep me from falling apart, Taking everything that comes your way good or bad, Even though you're not my father you'll always be my dad, I can't count high enough for every time you've went out of your way, Knowing you're there keeps me going everyday, When I need encouragement, you're the first to give it, When I have a problem, you always have the best advise to fix it, I could sit here and say Thank-you from now till I die but it wouldn't be enough, I can only wish if I went through what you did I could be so tuff, I'll always love you unconditionally, From now till an eternity. Thanks a lot for being a wonderful brother.

For all my friends and juniors....for everyone who is missing his/her loved ones

This is for all my dear friends and dear juniors who are feeling bad because of the absence of their seniors,for everyone who is shedding tears at this moment of biding adieu to each other : दुनिया कुछ और नहीं एक बड़ा घर समझ लो किरायदार बदलते रहते हैं ,मकानमालिक कभी बदलता नहीं अलगाव भी ज़रूरी है की दुनिया का दस्तूर है यही बिछोह नहीं ये मन का ,बस एक कमरे से निकल कर दुसरे कमरे में जाना है कल तक जो मेरा था ,आज वो तुम्हारा है और कल वही किसी और का हो जाना है गर दीवारे गिरा भी दी तुमने ,पर आँगन तो हमेशा उतना ही है हंसी ख़ुशी से बिता दो ये वक़्त की ये साथ आखिर कितना ही है अन्दर से चाहे जितने अलग हो पर सब कमरों की छतें तो मिलती ही हैं बगिया सब की अपनी अपनी है पर हर चमन में कली एक प्यार की खिलती ही है की दुनिया कुछ और नहीं एक बड़ा घर समझ लो कमरा बदलने का दुःख न मनाओ की ठिकाना तो हमेशा यही रहेगा जीवन कोई मंजिल नहीं ये तो एक सफर है जो चलता ही रहेगा कल तक हम अनजान थे आज इन दीवारों में हमारी हंसी गूंजती है और कल फिर इस बड़े से घर में कही खो जायेंगे पर जुदाई पर अश्क न बहाओ की अब हम अनजान नहीं है

More Stressed The Parents, The More Likely The Children Are To Have Tooth Decay

According to a study kids born to parents under stress-induced by low income, having little education, and being a single parent, are more likely to have tooth decay. Researchers from The Ohio State University examined the stress levels of parents whose young children either had no cavities or so many cavities that they had to receive anesthesia before undergoing dental treatment. The team looked the parents' education levels and income, and noted whether they were single parents. They finally measured the parents' stress levels again after the children had received dental treatment. It was found that low income, having little education, and being a single parent led to increases in parental stress. The researchers also found that the more stressed the parents, the more likely the children were to have decay. Interestingly, they even found that parents whose children had received treatment for dental decay had lessened stress of being a parent. Thus, it is required that dental